लाल गाड़ी
खान की कहानी !
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By Good Small Stories
भीमा अपने गिरोह तक पहुंचने के लिए नदी वापस पार करता है। उसने अपने गिरोह का पता लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह असफल रहा। दूसरी तरफ, पुलिस उनका पीछा कर रही थी।
भीमा ओर उसके साथी इतने ख़ूँख़ार थे कि शहर के शहर सारे शरीफ़ उनसे कांपते थे । ये बदमाश हफ़्ता वसूली , किड़नेपिंग , हाफ़ मर्डर एंव मर्डर जैसै अपराध हर रोज़ करते थे। परंतु इस बार भीमा ने बड़ा हाथ मारना चाहा था । शहर के मशहूर बिसनेस मेन मिस्टर इक़बाल खान को किड़नेप करने कि साज़िश रची थी एक बार भीमा के दोस्त रंजन जो कि एक बिल्डर थे ,वे मुआएने के लिए अपनी नयी साइट पर गए हुए थे जो कि खान कि ऑफ़िस के ठीक सामने थी । दोपहर के दो बज रहे थे , खान कि कार गेट से होकर निकली ओर रंजन को वहाँ देखा ओर उसके पास गाड़ी रोकी ।
खान : और भाई रंजन कुमार क्या कहा तक पहुची तुम्हारी साइट ?
रंजन: अरे अभी तो सुरु कि है , यार तुम्हारे यहाँ इस इलाक़े में माफिया भीमा कुछ का ज़्यादा ही ज़ोर है ।
खान: क्यूँ क्या हुआ ?
रंजन: अरे यार ! दो तीन बार यह आ चुका है , घूर घूर के देखता है कभी इस तरफ़ तो कभी उस तरफ़ । ऊपर वाले का शुक्र है कि। लाल गाड़ी नही आयी अभी तक ।
खान : अब ये लाल गांडी का क्या चक्कर है ।
रंजन : सुना है भीमा लाल गाड़ी किडनेपिंग के लिए काम में लेता है ।
खान : अरे क्या कुछ भी रंजन । तुम सिर्फ़ काम करो ये भीमा वीमा को भूल जाओ।
रंजन : याद है मिश्रा को भी एसे किया था , एक खोखा देना पड़ा था ।
खान : अरे छोड़ो मियाँ । खान ज़िंदा है तब तक तुम्हें कोई छू भी नहीं सकता। ये एक सच्चे मुसलमान का वादा है। अलविदा ।
खान वहाँ से निकल गया । रंजन साइट कि तरफ़ मुड़ने ही लगा था कि उसने लाल गाड़ी देखी जो रंजन कि गाड़ी कि तरफ़ जा रही थी । रंजन घबरा गया ओर तुरंत खान को फ़ोन किया ओर उसे बताया कि लाल गाड़ी उसके पीछे है । खान चौकना हो गया ओर गाड़ी को शहर के बाहर नदी के पास के फार्म हाउस कि ओर ले गया ओर साथ ही इन्स्पेक्टर चौबे को फ़ोन कर उसे भी बताया । खान ने पीछे मूड कर देखा लाल गाड़ी अभी भी उसके पीछे थी ।
खान फार्म हाउस पहुँचा ओर अंदर चला गया लाल गाड़ी वहाँ पहुँची भीमा ओर उसके साथी भी उसके पीछे गये । खान ने चौबे को फ़ोन किया ओर पूछा कि वो अभी तक क्यू नहीं आया । मैं बस पहुँचने हि वाला हूँ , चौबे ने कहा । इतने में भीमा की नज़र खान पर पड़ी। खान वहाँ से भागा ओर भीमा भी उसके पीछे भागा । भीमा ने गोली चलायी ओर उसके सभी साथी होशियार हो गए । इतने में पुलिस के आने कि आवाज़ आयी ओर भीमा के साथी भी भाग
निकले । खान नदी पार कर दूसरी ओर चला गया ओर भीमा भी खान के पीछे गया एवं अनेक प्रयासों के बाद भी नहीं ढूँढ नहीं पाया ।
भीम अपने गिरोह तक पहुंचने के लिए नदी वापस पार करता है। उसने अपने गिरोह का पता लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह असफल रहा। दूसरी तरफ, पुलिस उनका पीछा कर रही थी।
खान उस जगह से अछी तरह वाक़िफ़ था । भीमा किसी तरह अपने साथियों को ढूँढ लेता है जो नदी किनारे पेड़ के नीचे छिपे होते है ।ओर वे सब मिलकर पुलिस से बचने ओर खान को पकड़ने एक बार फिर नदी पर करते है वे नदी के उस छोर पहुँचने ही वाले थे कि चौबे ने उन्हें देख लिया । चौबे ने गोली चलायी परंतु निशाना चूक गया।पुलिस तुरंत उनके पीछे जाती है ओर भीमा ओर उसके साथी पुलिस गोली बारी करते है जिसमें दो पुलिसकर्मी शाहिद हो जाते है ।
इतने में खान जो कि ऊपर कि पहाड़ी पर छुपा होता है एक बड़ा पत्थर भीमा पर फेंकता है जिस से भीमा घायल हो जाता है ओर चौबे मौक़ा देखकर भीमा को गोली मार देता है ओर उसके बाक़ी साथियों को भी धर दबोचता है ।
खान राहत की साँस लेता है ओर चौबे को धन्यवाद देता है । ओर इस तरह हिम्मत ओर साहस दिखाते हुए लाल गाड़ी ओर भीमा के क़िस्से को सदा के लिए ख़त्म कर देता है । ऊपर वाला भी हमारी रक्षा तभी करता है जब हम स्वयं कि रक्षा के लिए तैयार रहते है ।
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